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Ujadi hue duniya

उजड़ी हुई दुनिया को तू आबाद न कर,

बीते हुए लम्हों को तू याद न कर,

एक कैद परिंदे ने ये कहा हम से..

मैं भुल चुका हूं उड़ना मुझे आजाद न कर!

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