2 line shayari teri niyat hi nhi thi

तेरी नियत ही नहीं थी साथ चलने की,

वरना निभाने वाले रास्ता देखा नहीं करते।
कौन कहता है हम झूठ नहीं बोलते,

एक बार खैरियत पूछ के तो देखिये।

शौक से बदलो मगर इतना याद रखना

अगर हम बदले तो करवट बदलते रह जाओऊगे।

उस से नफ़रत करता तो उसकी अहमियत बढ़ जाती,

मैंने माफ़ करके उसको, शर्मिंदा कर दिया।

लाखो अदाओ की अब जरुरत ही क्या है

जब वो फिदा ही हमारी सादगी पर है।

हद करते हो यार तुम भी,

इतना प्यार वो भी सबके सामने।

टुकड़े पड़े थे राह में किसी हसीना की तस्वीर के,

लगता है कोई दीवाना आज समझदार हो गया।

मोहब्बत करने की बात हो तो किसी से भी कर लेंगे,

मगर जो मोहब्बत होने की बात है वो तो बस तुमसे है।

थोड़ा तो ऐतबार किया होता तूने मुझपर,

मुहब्बत की है तुमसे.. कोई फरेबी नहीं।

बेशक तू बदल ले अपने आप को लेकिन ये याद रखना

तेरे हर झूठ को मेरे सिवा कोई समझ नहीं सकता।