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ग़म शायरी

चाहत तो हर किसी…

चाहत तो हर किसी की पूरी नहीं होती, ग़मों के बिना जिन्दगी आशा नहीं होती, कुछ लोग तो बीच मे ही साथ छोड़ देते हैं, पर बिना किसी के ज़िंदगी अधूरी नहीं होती।

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जब भी करीब…

जब भी करीब आता हूँ बताने के किये, जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये, महफ़िलों की शान न समझना मुझे, मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये.

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बदन में आग सी…

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है, कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है, इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही, दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है।

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